Wednesday, September 14, 2011

केवल हरि-गुरु कि बात छोड़कर और कोई बात हमे सुनने का अधिकार नहीं,केवल गुरु- शरणागति ही करनी हैं।
-----श्री महाराजजी.


हरि-गुरु प्रेम में ही सुख मिलेगा, न की संसार में।