Sunday, September 18, 2011

कोई दोष महापुरुष के साथ रहकर भी इसलिए नहीं जाता है क्योकि जीव उसके लिए क्रियमान नहीं करता । यध्यपी भगवान में मन का एटेचमेंट रहने से सारे दोष अपने आप ही चले जायेंगे, पर मन भगवान में सदा नहीं लगा रहता। इसलिए संसार के दोषों को माइनस करने के बारे में भी प्रयत्न करते रहना चाहिये ,प्रयत्न करना पड़ता है ।
--------श्री महाराजजी.