Saturday, January 26, 2013

श्री महाराजजी के मुखारविंद से:

टाइम बरबाद न करो। जितना समय पेट भरने के लिए जरूरी है उतना समय संसार को दो,बाकी टाइम का उपयोग करो। भगवदविषय में लगाओगे तो बहुत जल्दी आगे बढ़ जाओगे अंत:करण की शुद्धि की और। और अगर मर गए बीच में तो जो साधना की है हमारी है वो तुमको फिर मनुष्य बना देगी और फिर कोई गुरु मिल जायेगा या तुम्हारा वही पुराना गुरु दूसरा रूप धारण करके आ जायेगा और तुमको फिर आगे बढ़ाएगा। अँधेर नहीं है भगवान के यहाँ कि बीच में छोड़ दिया गुरुजी ने। ऐसा नहीं होता। वो सदा के लिए हमारा साथ देता है भगवद प्राप्ति तक। इसलिए टाइम का उपयोग करो,समय नष्ट न करो, साधना करते रहो।
श्री महाराजजी के मुखारविंद से:

टाइम बरबाद न करो। जितना समय पेट भरने के लिए जरूरी है उतना समय संसार को दो,बाकी टाइम का उपयोग करो। भगवदविषय में लगाओगे तो बहुत जल्दी आगे बढ़ जाओगे अंत:करण की शुद्धि की और। और अगर मर गए बीच में तो जो साधना की है हमारी है वो तुमको फिर मनुष्य बना देगी और फिर कोई गुरु मिल जायेगा या तुम्हारा वही पुराना गुरु दूसरा रूप धारण करके आ जायेगा और तुमको फिर आगे बढ़ाएगा। अँधेर नहीं है भगवान के यहाँ कि बीच में छोड़ दिया गुरुजी ने। ऐसा नहीं होता। वो सदा के लिए हमारा साथ देता है भगवद प्राप्ति तक। इसलिए टाइम का उपयोग करो,समय नष्ट न करो, साधना करते रहो।

 

कभी यह ना सोचो कि कृपा की कमी है। कमी जो है वह हममे ही है। महापुरुष शरणागत के लिये क्या-क्या भगीरथ प्रयत्न करता है, यह तो भगवतप्राप्ति होने पर ही साधक को समझ में आ सकता है। सब लोग कमरा बंद करके सोचे तो पायेंगे कि मेरा कितना कायापलट हो गया? में कहाँ जा रहा था,कहाँ लाकर खड़ा कर दिया महाराजजी ने?"
वे (हरि-गुरु) सदैव हमारी रक्षा करते रहे हैं, वर्तमान में भी कर रहे हैं। हम नहीं जानते हम किस खतरे में पड़ जाते अब तक?
-----श्री महाराजजी।
वे (हरि-गुरु) सदैव हमारी रक्षा करते रहे हैं, वर्तमान में भी कर रहे हैं। हम नहीं जानते हम किस खतरे में पड़ जाते अब तक?
 -----श्री महाराजजी।

 

Happy to be born in India where Shree Krishna and their Saints selected as their Leelabhoomi.
Happy to born in India at the time of Shree Maharajji's Incarnation on this earth and have selected India as their leelabhoomi to get away the clutches of Maya on souls.

India is a place where flowless bhakti flows under the guidance of Rasik Saints.
All Glories to Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj who is working tirelessly only and only for the upliftment of souls to make them freed from clutches of Maya.
Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj Ki Jai.
Radhey Radhey.
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EVERY MOMENT OF THE LIFE OF JAGADGURU SHREE KRIPALUJI MAHARAJ IS AN ABSOLUTE DIVINE CHARITY WHOSE MAGNIFICENCE CANNOT BE COMPREHENDED WITH A MATERIAL MIND.HE HAS APPEARED IN THE WORLD TO GUIDE THE SOULS TO GOD AND TO GRACE THE DEVOTED SOULS WITH THE DEVOTIONAL BHAO OF RADHAKRISHNA LOVE. *****************RADHEY-RADHEY**************
 

Friday, January 25, 2013

The most important part of sankirtan is rupdhyan (loving remembrance).

रूपध्यान साधना का प्राण है। सदा याद रखो।
........SHRI MAHARAJJI.
The most important part of sankirtan is rupdhyan (loving remembrance).

रूपध्यान साधना का प्राण है। सदा याद रखो।
........SHRI MAHARAJJI.

 
 



God takes complete responsibility of those who are exclusively surrendered to Him.
......SHRI MAHARAJJI.
 
There is no true happiness in the material world. If happiness is perceived anywhere, it is only an illusion.
.........SHRI MAHARAJJI.
There is no true happiness in the material world. If happiness is perceived anywhere, it is only an illusion.
.........SHRI MAHARAJJI.
 

Thursday, January 24, 2013

At the time of death, all relatives of this body are left behind. But God always stays with the soul. In whichever form of life the soul goes, to whichever place the soul goes, God stays with the soul. And God is a friend too. He is sentient and so is the soul.
 

All the Saints and scriptures stress that the name should always be remembered or chanted with selfless love; only then it will sprout the seed of Divine love that lies dormant in the heart of the devotee.

Wednesday, January 23, 2013

Fix your mind on God, and keep increasing the desire for service. This is the best tool to conquer the mind.

 
 


It is only by devotional practice that the heart becomes pure and then one can attain Divine Love of Shri Krishn.

 
समस्त आध्यात्मिक शंकाओ का अकाट्य तर्कों द्वारा पूर्ण समाधान........

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के प्रवचन नित्य प्रतिदिन अवश्य सुने।

राधे-राधे।
Photo: समस्त आध्यात्मिक शंकाओ का अकाट्य तर्कों द्वारा पूर्ण समाधान........

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के प्रवचन नित्य प्रतिदिन अवश्य सुने।

राधे-राधे।


 
"Bhakti is the recognition of our sweet relationship with Krishn. It directly relates to God Krishn Who is beyond this world of maya."
 
"Radha Krishn are so kind and loving that They are waiting for you with Their open arms to embrace. Leaving all the worldly attachments just look at Them with full faith and confidence like a small child and They will become yours forever."
 

Tuesday, January 22, 2013

यमराज ताक लगाए बैठा है कि आपका टाइम पूरा हो गया और बिना permission के बिना बताये ले जायेगा। तो यमराज ले जाये चाहे गोलोकवाले ले जायें टाइम पर सभी को जाना पड़ेगा।
............श्री महाराजजी।
यमराज ताक लगाए बैठा है कि आपका टाइम पूरा हो गया और बिना permission के बिना बताये ले जायेगा। तो यमराज ले जाये चाहे गोलोकवाले ले जायें टाइम पर सभी को जाना पड़ेगा।
 ............श्री महाराजजी।

 
 

अमोलक रतन मिलत बिनु मोल |
प्रेम-रतन याचत ज्ञानीजन, सुन लो कानहिं खोल |
श्याम प्रेम बिनु ब्रह्म-समाधिहुँ, मनहुँ निंब रस घोल |
तेहि बिनु कर्म, योग सब छूछो, लेहु तराजुहिं तोल |
स्वर्ग कर्म ते, सिद्धि योग ते, प्रेम बोल हरि बोल |
...
रतन ‘कृपालु’ अमोलक पायो, हमहुँ बजावत ढोल ||


भावार्थ - अमूल्य रत्न बिना मूल्य के मिलता है, यह कैसी विलक्षण बात है | इस अमूल्य प्रेम-रत्न को परमहंस लोग भी चाहते हैं, कान खोलकर सुन लो | श्यामसुन्दर के प्रेम के बिना ब्रह्मज्ञानियों की निर्विकल्प समाधि भी नीम के रस के समान कड़वी है | प्रेम के बिना कर्म एवं योगादि सब थोथे हैं, क्योंकि कर्म से स्वर्ग मिलता है एवं योग से सिद्धि मिल सकती है किन्तु प्रेम तो ‘हरि बोल’ बोलने से ही प्राप्त हो सकता है | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं हमने तो यह अमूल्य निधि ढोल बजाकर प्राप्त कर ली |

( प्रेम रस मदिरा सिद्धान्त – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति.
अमोलक रतन मिलत बिनु मोल |
प्रेम-रतन याचत ज्ञानीजन, सुन लो कानहिं खोल |
श्याम प्रेम बिनु ब्रह्म-समाधिहुँ, मनहुँ निंब रस घोल |
तेहि बिनु कर्म, योग सब छूछो, लेहु तराजुहिं तोल |
स्वर्ग कर्म ते, सिद्धि योग ते, प्रेम बोल हरि बोल |
रतन ‘कृपालु’ अमोलक पायो, हमहुँ बजावत ढोल ||


भावार्थ - अमूल्य रत्न बिना मूल्य के मिलता है, यह कैसी विलक्षण बात है | इस अमूल्य प्रेम-रत्न को परमहंस लोग भी चाहते हैं, कान खोलकर सुन लो | श्यामसुन्दर के प्रेम के बिना ब्रह्मज्ञानियों की निर्विकल्प समाधि भी नीम के रस के समान कड़वी है | प्रेम के बिना कर्म एवं योगादि सब थोथे हैं, क्योंकि कर्म से स्वर्ग मिलता है एवं योग से सिद्धि मिल सकती है किन्तु प्रेम तो ‘हरि बोल’ बोलने से ही प्राप्त हो सकता है |  ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं हमने तो यह अमूल्य निधि ढोल बजाकर प्राप्त कर ली |


( प्रेम रस मदिरा   सिद्धान्त – माधुरी )
  जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति

 

Devotion to Guru is absolutely essential along with devotion to God, because it is only through the grace of the Guru that one can attain one’s goal.
...........SHRI MAHARAJJI.
Devotion to Guru is absolutely essential along with devotion to God, because it is only through the grace of the Guru that one can attain one’s goal.
...........SHRI MAHARAJJI.




अगर कोई महापुरुष की कृपा को ' फील ' करना सीख जाये , तो बस उसे और साधना करने की आवश्कता नहीं है !जिसके पीछे -पीछे भगवान् चलता है , उसने हमें दर्शन दिये , बस यही सोच - सोचकर , बलिहार जाकर , हमें हर्ष में पागल जाना चाहिये ! एक ईश्वरीय अक्षर का भी ज्ञान गुरु करा दे और उसके बदले में सम्पूर्ण पृथ्वी भी अगर कोई दे दे , तो भी उसके ऋण से उऋण नहीं हो सकता !

**********जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु ***********
हरि में हरि व गुरु , एवं गुरु में भी हरि गुरु दोनों समाहित हैं यह ज्ञान सदैव स्मरण रहना चाहिये ।
******श्री महाराज जी।
हरि में हरि व गुरु , एवं गुरु में भी हरि गुरु दोनों समाहित हैं यह ज्ञान सदैव स्मरण रहना चाहिये ।
 ******श्री महाराज जी।

 

Monday, January 21, 2013

We should constantly beg for forgiveness for all our sins with utmost humility.

----jagadguru shri kripalu ji maharaj.
We should constantly beg for forgiveness for all our sins with utmost humility.

----jagadguru shri kripalu ji maharaj.

 

If you desire to be a true devotee, you must see God within each and every living being.
----------jagadguru shri kripalu ji maharaj.
If you desire to be a true devotee, you must see God within each and every living being. 
----------jagadguru shri kripalu ji maharaj.

 
 

खरे हरि कुंज-लतान तरे |
सा रे ग म प ध नि सुरन सों पुनि पुनि, मुरलिहिं तान भरे |
तानन श्री वृषभानुलली के, गुनगन गान करे |
करत ललिहिं गुन-गान मूँदि दृग, तिनकोइ ध्यान धरे |
धरत ध्यान देखन कहँ छिन छिन, नैनन प्रान लरे |
...
परत ‘कृपालु’ आन जब प्रानन, तब ही जानि परे ||

भावार्थ - श्री श्यामसुन्दर निकुंज में लताओं के नीचे खड़े हैं | सा रे ग म प ध नि इन सात स्वरों के विविध आरोह-अवरोह के द्वारा बार-बार मुरली बजा रहे हैं एवं उसी मुरली में श्री वृषभानुनन्दिनी राधा के गुणों को गा रहे हैं | उन्हीं का ध्यान भी कर रहे हैं | उन्हीं के ध्यान में अनुरक्त श्यामसुन्दर के नेत्र एवं प्राण परस्पर झगड़ा कर रहे हैं | झगड़ा यह है कि ये दोनों ही, एक दूसरे से प्रथम ही किशोरी जी से मिलना चाहते हैं | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं जब किसी के ऊपर कोई विपति आ जाती है तभी उसको अनुभव होता है | तात्पर्य यह है कि सनातन आनंदमय ब्रह्म को भी श्री किशोरी जी के वियोग में रोना पड़ता है |


( प्रेम रस मदिरा श्रीकृष्ण – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति.
खरे हरि कुंज-लतान तरे |
सा रे ग म प ध नि सुरन सों पुनि पुनि, मुरलिहिं तान भरे |
तानन श्री वृषभानुलली के, गुनगन गान करे |
करत ललिहिं गुन-गान मूँदि दृग, तिनकोइ ध्यान धरे |
धरत ध्यान देखन कहँ छिन छिन, नैनन प्रान लरे |
परत ‘कृपालु’ आन जब प्रानन, तब ही जानि परे ||


भावार्थ -  श्री श्यामसुन्दर निकुंज में लताओं के नीचे खड़े हैं | सा रे ग म प ध नि इन सात स्वरों के विविध आरोह-अवरोह के द्वारा बार-बार मुरली बजा रहे हैं एवं उसी मुरली में श्री वृषभानुनन्दिनी राधा के गुणों को गा रहे हैं | उन्हीं का ध्यान भी कर रहे हैं | उन्हीं के ध्यान में अनुरक्त श्यामसुन्दर के नेत्र एवं प्राण परस्पर झगड़ा कर रहे हैं | झगड़ा यह है कि ये दोनों ही, एक दूसरे से प्रथम ही किशोरी जी से मिलना चाहते हैं | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं जब किसी के ऊपर कोई विपति आ जाती है तभी उसको अनुभव होता है | तात्पर्य यह है कि सनातन आनंदमय ब्रह्म को भी श्री किशोरी जी के वियोग में रोना पड़ता है |


( प्रेम रस मदिरा  श्रीकृष्ण  –  माधुरी )
   जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति

 
 



आप लोग शायद नहीं जानते आपके ह्रदय में भगवान् नित्य रहते हैं , लेकिन कोई फायदा नहीं ! सुनते हैं रहते हैं , रहते हैं अब आइडियाज (ideas) नोट करते हैं ! हाँ मानते नहीं ! अगर मान लें तो पाप कैसे करें ?अगर मान लें कि वो हमारे ह्रदय में हैं तो हम प्राइवेसी (privacy) जो रखते हैं अपनी , अपनी बीबी के खिलाफ सोच रहे हैं उसके बगल में बैठ कर , आपने ही बाप के खिलाफ सोच रहे हैं उसके ही पास में बैठ कर , अपने ही गुरु के खिलाफ भी सोचने लगते हैं , उन्ही के सामने बैठ कर के ! और तो और भगवान् को भी नहीं छोड़ते ! ये क्या भगवान् भगवान् भगवान् लगा रखा था ! उसके नौ बच्चे थे दसवाँ हुआ है आज ! हमारे एक बच्चा था मर गया ! क्या भगवान् का न्याय है तुम्हारे ! इसमें भगवान् क्या करें भाई ? ये तो तुम्हारे कर्म के हिसाब से फल मिलता है ! लेकिन अल्पज्ञ जीव अपनी अल्पज्ञता का स्वरूप दिखा देता है !

*************जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज**************

एक साधक का प्रश्न -- गुरु जीव पर अहैतु की कृपा क्यों करता है ?

श्री महाराजजी द्वारा उत्तर -- गुरु जीव पर अहैतु की कृपा करता है जिससे जीव भगवत्प्राप्ति अर्थात आनंद प्राप्ति कर सके , क्योंकि प्रत्येक जीव आनंद चाहता है और वह उसे संसार में ढूंढ़ रहा है , जहाँ आनंद नहीं है ! अतः गुरु ही अहैतु की कृपा कर उसे सही रास्ता ही नहीं बताता बल्कि उसे उस गन्तव्य स्थान तक पहुँचा भी देता है !

Sunday, January 20, 2013

To love God is to trust Him.
To love God is to trust Him.

 
 

"By each passing day, Our bodies are being dragged to graves but our minds are carried by illusions...may we change.."
"By each passing day, Our bodies are being dragged to graves but our minds are carried by illusions...may we change.."

 

As a devotee, our job is to increase our tolerance. Even when somebody says something terrible about us or behaves badly towards us, we should not get mentally or emotionally disturbed.
.............SHRI MAHARAJJI.
 
Shri Krishna says, "I perceive Shri Radha alone, in each and every particle of my entire creation."
Shri Krishna says, "I perceive Shri Radha alone, in each and every particle of my entire creation."

 

The Divine Love that is the goal of human life cannot be stolen since God and Guru are all-knowing. It cannot be robbed since God and Guru are all-powerful. It can only be begged for. And it is God's law that anyone who begs for it with 100% sincerity is guaranted to get it.

--------Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj.
The Divine Love that is the goal of human life cannot be stolen since God and Guru are all-knowing. It cannot be robbed since God and Guru are all-powerful. It can only be begged for. And it is God's law that anyone who begs for it with 100% sincerity is guaranted to get it.
 
--------Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj.

 

Saturday, January 19, 2013

गुरु द्वारा ही श्री हरि के स्वरूप का सच्चा तत्व - ज्ञान प्राप्त होता है ! गुरु के अभाव में तो संसार में क , ख , ग , घ का ज्ञान भी असम्भव है !

**********जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ************
गुरु द्वारा ही श्री  हरि के स्वरूप का सच्चा तत्व - ज्ञान प्राप्त होता है ! गुरु के अभाव में तो संसार में क , ख , ग , घ का ज्ञान भी असम्भव है !

**********जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ************

 

परदोष - चिंतन करना ही स्वयं के सदोष होने का पक्का प्रमाण है !
*****श्री महाराज जी .
परदोष - चिंतन करना ही स्वयं के सदोष होने का पक्का प्रमाण है !
*****श्री महाराज जी .