Sunday, January 13, 2013




अगर कोई महापुरुष की कृपा को ' फील ' करना सीख जाये , तो बस उसे और साधना करने की आवश्कता नहीं है !जिसके पीछे -पीछे भगवान् चलता है , उसने हमें दर्शन दिये , बस यही सोच - सोचकर , बलिहार जाकर , हमें हर्ष में पागल जाना चाहिये ! एक ईश्वरीय अक्षर का भी ज्ञान गुरु करा दे और उसके बदले में सम्पूर्ण पृथ्वी भी अगर कोई दे दे , तो भी उसके ऋण से उऋण नहीं हो सकता !

**********जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु ***********