Thursday, February 21, 2013

दीनता , गुरु शरणागति , हरि - अभेदवाद तथा निरंतर दिव्य दर्शन एवं दिव्य प्रेम -प्राप्ति की परमव्याकुलता को ही वास्तविक साधना मानो !
:::::::::जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज::::::::
दीनता , गुरु शरणागति , हरि - अभेदवाद तथा निरंतर दिव्य दर्शन एवं दिव्य प्रेम -प्राप्ति की परमव्याकुलता को ही वास्तविक साधना मानो ! 
::::::::::::::जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज:::::::::::::::::