Friday, February 15, 2013

मन को भरोसा दिलाओ आठु यामा। तेरे तो हैं परम हितेषी श्याम श्यामा।।

और द्वार जाओ न,अनन्य बनो बामा।त्रिगुण ,त्रिताप,त्रिकर्म,काटें श्यामा।।

भोरे बनि जाओ क्योंकि भोरी भारी श्यामा। भोरी भारी को प्रिय भोरा उरधामा।।
...

हरि-गुरु ते न कछु माँगो ब्रजबामा। दोनों ते सदा करो प्रेम निष्कामा।।

माँगना हो तो माँगो सेवा श्याम श्यामा। सेवा हित पुनि माँगो प्रेम निष्कामा।।

जल बिनु मीन ज्यों विकल कह बामा। वैसे मन व्याकुल हो जाये बिनु श्यामा।।

रहा नहीं जाये जब मिले बिनु श्यामा। तब जानो प्रेमबीज़,जामा उरधामा।।

--------जगद्गुरुत्तम श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित।
मन को भरोसा दिलाओ आठु यामा। तेरे तो हैं परम हितेषी श्याम श्यामा।।

 और द्वार जाओ न,अनन्य बनो बामा।त्रिगुण ,त्रिताप,त्रिकर्म,काटें श्यामा।।

 भोरे बनि जाओ क्योंकि भोरी भारी श्यामा। भोरी भारी को प्रिय भोरा उरधामा।।

 हरि-गुरु ते न कछु माँगो ब्रजबामा। दोनों ते सदा करो प्रेम निष्कामा।।

 माँगना हो तो माँगो सेवा श्याम श्यामा। सेवा हित पुनि माँगो प्रेम निष्कामा।।

 जल बिनु मीन ज्यों विकल कह बामा। वैसे मन व्याकुल हो जाये बिनु श्यामा।।

 रहा नहीं जाये जब मिले बिनु श्यामा। तब जानो प्रेमबीज़,जामा उरधामा।।

 --------जगद्गुरुत्तम श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित।