Sunday, February 3, 2013

सेवा का अर्थ है , स्वामी को सुख देना ! एक सेवक होता है , एक सेव्य होता है और एक सेवा होती है ! ये तीन वस्तुएँ हैं , सेवक , सेव्य और सेवा ! तो सेव्य वह जिसकी सेवा की जाये , और सेवक वह जो सेवा करे !
*********जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज**********
सेवा का अर्थ है , स्वामी को सुख देना ! एक सेवक होता है , एक सेव्य होता है और एक सेवा होती है ! ये तीन वस्तुएँ हैं , सेवक , सेव्य और सेवा ! तो सेव्य वह जिसकी सेवा की जाये , और सेवक वह जो सेवा करे !
*********जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज**********