Saturday, July 19, 2014

"हम लोगो ने कभी नहीं सोचा,कि ये मानव देह की क्या इम्पोर्टेंस(importance) है....हम देख तो रहे हें, एक गढ़े में, करोडो कीड़े कैसा जीवन बिता रहे है....हम भी कभी वही थे......
एक जंगल का प्राणी, भूख के मारे मर जाता है, पानी के मारे मर जाता है, उससे बलवान प्राणी उसको खा जाता है, वो कुछ नहीं कर सकता...ये सब हम लोग देख रहे है आँख से, कि हम भी उन सब योनियों में जा चुके है और वे सब दुःख भोग चुके है और हम फिर वही गलती कर रहे है, कि मानव देह पाकर और इस देह का महत्व realize नहीं करते, महसूस नहीं करते....
और फिर मानव देह मिल भी गया है...आज ७ अरब(7 Billion) आदमी है हमारी दुनिया में , १९३ देश(193 countries) है..१९३ देशो की आबादी ७ अरब...मनुष्यो की ......
कितने आदमियों को तत्वज्ञान दिया है किसी गुरु ने ??...
सोचिये अकेले में......
ये सौभग्य कितने लोगो को मिला है, शायद ७ करोड़ भी नहीं होंगे ऐसे...जिनको पूरा पूरा ज्ञान हो गया हो....हम कौन है?, हमें क्या करना है? और हमारा लक्ष्य क्या है और वो कैसे मिलेगा?
ये ज्ञान बेठ गया हो...किसी को थोडा सा ज्ञान है, बिचारे को कम मौका मिला है, किसी को गलत ज्ञान है, उसने बहोत मेहनत की है लेकिन उसका गाइड(Guide) गलत था, इसलिए गलत ज्ञान हो गया, गलत साधना कर रहा है जिंदगी भर.....तो बार बार सोचिये की हम कितने सौभाग्यशाली है और इस देह का महत्व realize करो क्षण क्षण...!!!!!!"
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।