Thursday, July 3, 2014

मन में निश्चय करो की हमारा लक्ष्य हरि-गुरु सेवा ही रहे, हम उनके लिए ही सब कार्य करें, उन्हीं के लिए ही जियें और अंत में भगवान का स्मरण करते हुए ही इस नश्वर शरीर को त्याग कर भगवान के श्रीचरणों में चलें जाएँ ।
जय श्री राधे।