Wednesday, July 9, 2014

पंच तत्व अरु अहं का, भेदन करि दे ज्ञान।
पै बिनु भक्ति न करि सके , भेदन प्रकृति महान।।६२।।

भावार्थ- ज्ञानी , ज्ञान से पृथिवी , जल , तेज , वायु एवं आकाश तथा उससे भी परे अहंकार आवरणों का भेदन कर देता है। किन्तु अहंकार से परे २ तत्व महान एवं प्रकृति अवशिष्ट रह जाते हैं। इन दोनों में भी प्रमुख प्रकृति या माया है। यह प्रकृति केवल भक्ति से ही समाप्त की जा सकती है।
भक्ति शतक (दोहा - 62)
-जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
(सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति)