Tuesday, July 8, 2014

चाहे जैसी भी परिस्थिति हो सदैव गुरु के अनुकूल ही चिन्तन करो | प्रतिकूल परिस्थिति में भी अनुकूल चिन्तन बना रहे तभी समझो कि हमारी स्थिति ठीक है | चाहे कैसी भी कठिन सेवा हो या आज्ञा हो उसके पालन में प्राणपन से बलिहार जाना चाहिए |
............श्री महाराज जी |