Thursday, May 22, 2014

Receiving a mantra from the Guru, massaging his feet, offering him worldly objects or lavishing false praises on him does not constitute true surrender.
केवल कान फूंका लेने मात्र से अथवा गुरूजी के पैर दबाने मात्र से , अथवा गुरु जी को सांसारिक द्रव्य देने मात्र से ,अथवा बातें बनाने मात्र से ,शरणागति नहीं हो सकती !!
------ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज.