Sunday, May 11, 2014

विपरीत चिन्तन हो, तुरन्त लाईन काट दो, - “नहीं मैं ही गलत हूँ, वो सही है, उनसे गलत काम हो ही नहीं सकता |” जैसे खाना खाते समय यदि एक चीज भी गलत आई, थोड़ी सी प्रतिकूल चीज आई, मुख से बाहर निकाल दिया | ऐसे ही आत्मा के प्रतिकूल पदार्थ यानी प्रतिकूल चिन्तन प्रारम्भ होते ही इलाज करो, अन्यथा द्रौपदी के चीर की भाँति बढ़ता ही जायेगा, फिर सँभल नहीं पायेगा | भगवान कहते हैं, “समस्त शास्त्रों का समस्त ज्ञान समस्त जीव प्राप्त नहीं कर सकते हैं |” यदि वह केवल इतना ही याद रखें कि विरक्त होकर वास्तविक गुरु के शरणागत हों और प्रतिक्षण गुरु के अनुकूल ही चिन्तन व संकल्प करें तो उनका काम बन जायेगा |
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

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