Friday, March 1, 2013

जगद्गुरु प्रभु श्री कृपालु जी महाराज हमें समझाते हैं -

**अकेले में सोचो, कमरा बंद करके. जब तक माया के अंडर में है जीव तब तक कौन सी खराबी उसमे नहीं है. कामनाएं नहीं है, कि क्रोध नहीं है, कि लोभ नहीं है, कि मोह नहीं है.. कौन सा दोष नहीं है. अनंत दोष भरे हैं उसमे से एक दोष कोई कह दे, तो क्यों फीलिंग होती है? अपना सर्वनाश क्यों करता है साधक? क्योकि फील करोगे तो मन गन्दा होगा. उससे हानि होगी शरीर को भी. क्रोध से. ये साइंस कहती है. तुम आत्मा हो...**

-जगद्गुरु प्रभु श्री कृपालु जी महाराज.
जगद्गुरु प्रभु श्री कृपालु जी महाराज हमें समझाते हैं -
 
**अकेले में सोचो, कमरा बंद करके. जब तक माया के अंडर में है जीव तब तक कौन सी खराबी उसमे नहीं है. कामनाएं नहीं है, कि क्रोध नहीं है, कि लोभ नहीं है, कि मोह नहीं है.. कौन सा दोष नहीं है. अनंत दोष भरे हैं उसमे से एक दोष कोई कह दे, तो क्यों फीलिंग होती है? अपना सर्वनाश क्यों करता है साधक? क्योकि फील करोगे तो मन गन्दा होगा. उससे हानि होगी शरीर को भी. क्रोध से. ये साइंस कहती है. तुम आत्मा हो...**
 
-जगद्गुरु प्रभु श्री कृपालु जी महाराज.