Thursday, March 7, 2013

रूपध्यान करते समय गुरु या भगवान् की जिस लीला में जाना चाहो , चले जाओ तथा उनके दिव्य मिलन व दर्शन के लिए तड़पन पैदा करो। लाख - लाख आसूँ बहाओ लेकिन किसी भी आसूँ को जब तक सच्चा न मानो , तब तक स्वयं श्यामसुंदर आकर अपने पीताम्बर से आँसुओं को न पोंछें। इतनी व्याकुलता पैदा करो कि नेत्र और प्राणों में बाजी लग जाये , पल-पल युग के समान लगे।

::::::::::जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु:::::::::::
रूपध्यान करते समय गुरु या भगवान् की जिस लीला में जाना चाहो , चले जाओ तथा उनके दिव्य मिलन व दर्शन के लिए तड़पन पैदा करो। लाख - लाख आसूँ बहाओ लेकिन किसी भी आसूँ को जब तक सच्चा न मानो , तब तक स्वयं श्यामसुंदर आकर अपने पीताम्बर से आँसुओं को न पोंछें। इतनी व्याकुलता पैदा करो कि नेत्र और प्राणों में बाजी लग जाये , पल-पल युग के समान लगे।

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