Saturday, March 9, 2013

पापों ते मलिन मन गोविंद राधे |
वेद गुरु वचनों में शंका करा दे ||

भावार्थ- जब तक मन शुद्ध नहीं होता तब तक वेद-वाणी एवं गुरु वचनों पर विश्वास नहीं होता |
 
भव रोग वैध वेद गोविंद राधे |
वेद ज्ञान गुरु ते गुरु वैध बता दे ||

भावार्थ- भव रोग का चिकित्सक शास्त्र है | शास्त्र-ज्ञान गुरु से होता है अत: गुरु ही वैध है |

वैध कहे औषधि ले गोविंद राधे |
रोगी कहे पूर्व मोहिं स्वस्थ बना दे ||

भावार्थ- रोगी का रोग दूर करने के लिये वैध औषधि लेने की सम्मति प्रदान करता है | यदि रोगी कहे कि पहले मुझे स्वस्थ कर दो फिर मैं औषधि ग्रहण करूँगा तो वैध भला रोगी की क्या सहायता कर सकता है |

..................राधा गोविंद गीत ( जगद्गुरु श्री कृपालु
जी महाराज )...........
पापों ते मलिन मन गोविंद राधे |
वेद गुरु वचनों में शंका करा दे ||

भावार्थ- जब तक मन शुद्ध नहीं होता तब तक वेद-वाणी एवं गुरु वचनों पर विश्वास नहीं होता |

भव रोग वैध वेद गोविंद राधे | 
वेद ज्ञान गुरु ते गुरु वैध बता दे ||

भावार्थ- भव रोग का चिकित्सक शास्त्र है | शास्त्र-ज्ञान गुरु से होता है अत: गुरु ही वैध है |

वैध कहे औषधि ले गोविंद राधे |
रोगी कहे पूर्व मोहिं स्वस्थ बना दे ||

भावार्थ- रोगी का रोग दूर करने के लिये वैध औषधि लेने की सम्मति प्रदान करता है | यदि रोगी कहे कि पहले मुझे स्वस्थ कर दो फिर मैं औषधि ग्रहण करूँगा तो वैध भला रोगी की क्या सहायता कर सकता है |


..................राधा गोविंद गीत ( जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ).................