Wednesday, March 20, 2013

किसी महापुरुष या साधक का अपमान करना भी घोर कुंसग है | साधकगण बहुधा अपने आपको तथा अपने महापुरुष को ही सत्य समझते हैं, शेष साधकों एवं महापुरुषों में दुर्भावना-पूर्ण निर्णय देते हैं | यह महान भूल है | इससे नामापराध हो जायेगा, जिसके परिणामस्वरूप अपना महापुरुष तथा अपना इष्टदेव भी प्रसन्न न हो सकेगा; क्योंकि समस्त महापुरुष तथा भगवान् परस्पर एक ही हैं |

.....जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज................................
किसी महापुरुष या साधक का अपमान करना भी घोर कुंसग है | साधकगण बहुधा अपने आपको तथा अपने महापुरुष को ही सत्य समझते हैं, शेष साधकों एवं महापुरुषों में दुर्भावना-पूर्ण निर्णय देते हैं | यह महान भूल है | इससे नामापराध हो जायेगा, जिसके परिणामस्वरूप अपना महापुरुष तथा अपना इष्टदेव भी प्रसन्न न हो सकेगा; क्योंकि समस्त महापुरुष तथा भगवान् परस्पर एक ही हैं |  

 .................................जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज................................