Monday, March 4, 2013

भगवान् के निमित किया हुआ पाप भी धर्म हो जाता है जाता है एवं भगवान् को छोड़कर किया हुआ धर्म भी पाप हो जाता है !
~~~~जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~
भगवान् के निमित किया हुआ पाप भी धर्म हो जाता है जाता है एवं भगवान् को छोड़कर किया हुआ धर्म भी पाप हो जाता है !
~~~~जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~