Saturday, April 12, 2014

क्रोध आवे भी तो भीतर ही रहने दो ! बाहर न आने पावे ये अभ्यास कर लो ! फिर उसके बाद भीतर भी न आने पावे ये अभ्यास कर लो ! एक साहब अपने सर्वेन्ट को डाँटता है कि देर से आया बेवकूफ , गधा और वो कहता है यस सर , यस सर ! भीतर गुस्सा है , बाहर यस सर क्योंकि अगर वो भी कह दे कि गधे ! तुम भी तो देर से आते हो ऑफिस ! भीतर से ऐसे ही कह रहा है लेकिन बाहर से कन्ट्रोल किये हुये है ! कटु वाक्य न बोलो , किसी के अपमान करने पर बाहर से उसका प्रतिवाद न करो और फिर भीतर से निकालो ! सब फैक्ट है ! मान लो तुम ऐसे हो !
~~~~जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज !