Wednesday, June 12, 2013

भगवति ने कीनी कृपा जो, ऐसों जायों लाल जी।
राघव चन्दा, यशुदा नन्दा, बनि गये राम कृपाल जी।।

नाम पतित-पावन है प्रभु का, संत जनन यह गाये हैं।
बिनु-कारण करुणाकर सब पर, अपना विरद निभाये हैं।।

श्यामा-श्याम को नाम रटवावें, ऐसों करत कमाल जी।
भक्तन-हित प्रभु नर-तनु धारयो, प्रेम सुधा बरसाने को।।

भक्त-प्रेम वश बने भिखारी, अपना आप लुटाने को।
प्रेम-भाव से जो भी पुकारे, देत प्रेम तत्काल जी।।

सहज स्नेही प्रभु हमारे, बड़े ही भोले-भालें हैं।
चरण-शरण में आकर देखो, प्रभु ऐसे है रखवार जी।।