Thursday, June 20, 2013

ज्ञान की परिभाषा गोविंद राधे।
जिससे बढ़े नित प्रेम श्याम का बता दे।।

कोटि कल्प सिर मारे गोविंद राधे।
भक्ति बिनु ब्रह्म ज्ञान हो ना बता दे।।

भक्ति बिनु ज्ञानी ज्ञान गोविंद राधे।
मिथ्या ज्ञानाभिमान बढ़ा दे।।

ज्ञान वैराग्य दोनों गोविंद राधे।
भक्ति महारानी के पुत्र हैं बता दे।।

भक्ति का मार्ग सरल गोविंद राधे।
नाव पर बैठो हरि पार करा दे।।

सर्व वेदान्त सार गोविंद राधे।
श्रीकृष्ण भक्ति वेदव्यास बता दे।।

प्रेम की सीमा नहीं गोविंद राधे।
किन्तु बढ़ता ही जाये सर्वदा बता दे।।

-----जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।