Tuesday, June 25, 2013

ये तो प्रेम की बात है उद्धव, बंदगी तेरे बस की नहीं है........

यहाँ सर दे के होते है सौदे, आशिकी इतनी सस्ती नहीं है॥

ये तो प्रेम की बात है उद्धव, बंदगी तेरे बस की नहीं है.........

प्रेम वालो ने कब वक्त पूछा, उनकी पूजा में सुन ले ऐ उद्धव।। यहाँ दम दम होती है पूजा, सर झुकाने की फुर्सत नहीं है॥

ये तो प्रेम की बात है उद्धव, बंदगी तेरे बस की नहीं है...........

जो असल में है मस्ती में डूबे, उन्हें क्या परवाह जिंदगी की। जो उतरती है चढ्ती है मस्ती, वो हकीकत में मस्ती नहीं है॥

ये तो प्रेम की बात है उद्धव, बंदगी तेरे बस की नहीं है............

जिनकी नज़रो में है श्याम प्यारे, वो तो रहते हैं जग से न्यारे। जिनकी नजरो में मोहन समाये,
वो नज़र फिर तरसती नहीं है॥

ये तो प्रेम की बात है उद्धव, बंदगी तेरे बस की नहीं है.............
ये तो प्रेम की बात है उद्धव, बंदगी तेरे बस की नहीं है...............................