Friday, September 7, 2012




"कभी यह ना सोचो कि कृपा की कमी है। कमी जो है वह हममे ही है। महापुरुष शरणागत के लिये क्या-क्या भगीरथ प्रयत्न करता है, यह तो भगवतप्राप्ति होने पर ही साधक को समझ में आ सकता है। सब लोग कमरा बंद करके सोचे तो पायेंगे कि मेरा कितना कायापलट हो गया? में कहाँ जा रहा था,कहाँ लाकर खड़ा कर दिया महाराजजी ने?"

No comments:

Post a Comment