Tuesday, March 10, 2015

सारा जीवन श्री महाराज जी ने हमारे कल्याण के लिए समर्पित किया.. क्षण क्षण हमारे उत्थान के लिए आतुर उन्होंने हम जीवों की ही सेवा की..!!!
उनका ऋण, उनके उपकार हम पर इतना है कि न वे गिने जा सकते हैं, न समझे जा सकते हैं, न कभी उतारे ही जा सकते है..
उनकी कही बातें, उनके आदेश हम सहर्ष मानें.. वे जैसे भी सुख पाते हैं, वैसा करें, वैसा बनें... इतना तो कर ही सकते है. इसमें हमारा ही कल्याण है..!!!
संसार की आसक्ति को हटाकर हरि-गुरु में प्रेम बढ़ाएंगे.. नित्य निरंतर उन्हीं का चिंतन करेंगे.. उन्हीं की सेवा के लिए प्लानिंग करेंगे.. उनकी कृपाओं को सोच सोच कर बलिहार जायेंगे और अपनी गलतियों की क्षमायाचना तथा उनकी सेवा और प्रेम पाने के लिए निष्काम रुदन करेंगे..!!!
फिर भी भला हम पामर जीव उनका क्या उपकार उतार पाएंगे.. 'आज्ञा सम न सुसाहिब सेवा'.. यही मानकर उनके कहे पर चल सकते हैं।
करुणावरुणालय उन 'कृपालु' गुरुदेव की सदा जय हो........!