Sunday, March 8, 2015

Although human body is invaluable, it is transient. Therefore to procrastinate in devotional practise even for a moment is the greatest loss.
मानव देह अमूल्य होते हुये भी क्षणिक है अतः परमार्थ साधना में एक क्षण का भी उधार सबसे बडी हानी है।
........श्री महाराज जी।