Monday, April 10, 2017

सौ बातन की इक , धरु मरलीधर ध्यान।
बड़वहु सेवा -वासना , यह सौ ज्ञानन ज्ञान।।७४।।

भावार्थ - अनंत सिद्धांतों का यही सार है कि सेव्य श्रीकृष्ण में मन का अनुराग हो। एवं श्रीकृष्ण सेवा की भावना निरंतर बढ़ती जाय। यही अंतिम तत्त्वज्ञान है।
भक्ति शतक (दोहा - 74)
-जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
(सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति)