Tuesday, April 25, 2017

चिन्तन प्रमुख है । सर्वनाश और भगवत्प्राप्ति, इन दोनों का एक सिद्धान्त है- चिन्तन । संसार का बार-बार चिन्तन किया, तो संसार मे आसक्ति हो गई । भगवान् का चिन्तन करने से भगवान् से अनुराग हो जायेगा । संसार में मन की आसक्ति बहुत गहरी है । यदि किसी के संयोग में सुख मिलता है तो उसके वियोग में दुःख मिलेगा, जितनी मात्रा में सुख मिलता है, उतनी मात्रा में वियोग होगा ॥
---- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।