Monday, July 1, 2013

JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ SAYS:

सत्य अहिंसा आदि मन ! बिन हरिभजन न पाय |
जल ते घृत निकले नहीं , कोटिन करिय उपाय ||३५||

भावार्थ – सत्य अहिंसादि दैविगुण केवल श्रीकृष्ण भक्ति से ही मिल सकते हैं | जैसे पानी मथने से घी नहीं निकल सकता | ऐसे ही अन्य करोड़ों उपायों से दैविगुण नहीं मिलते |

(भक्ति शतक )
जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित |