Friday, July 12, 2013

सब साधन संपन्न कहँ , पूछत सब संसार |
साधनहीन प्रपन्न कहँ , पूछत नंदकुमार ||३९||

भावार्थ – संसारी लोग उसी से प्यार करते हैं , जिसके पास संसारी वैभव होता है | किन्तु श्यामसुंदर अकिंचन से प्यार करते हैं |

(भक्ति शतक )
जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित |