Tuesday, April 9, 2013

एक बार हरि मिले गोविंद राधे |
माया जाय सदा सदा को ही बता दे ||

भावार्थ- एक बार यदि हरि का साक्षात्कार हो जाय तो सदा के लिये माया से छुटकारा मिल जाय |
 
एक बार हरि मिले गोविंद राधे |
सदा सदा को आनन्द दिला दे ||

भावार्थ- एक बार भगवान् के दिव्य दर्शन प्राप्त होने पर तो जीव सदा के लिये आनन्दमय हो जाता है |

हरि दर्शन ते ही गोविंद राधे |
उर माया ग्रन्थि जाती है बता दे ||

भावार्थ- भगवान् के दिव्य दर्शन प्राप्त होने पर ही जीव के हृदय से माया की ग्रन्थि समाप्त होती है |

..................राधा गोविंद गीत ( जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ).
एक बार हरि मिले गोविंद राधे |
माया जाय सदा सदा को ही बता दे ||

भावार्थ- एक बार यदि हरि का साक्षात्कार हो जाय तो सदा के लिये माया से छुटकारा मिल जाय |

एक बार हरि मिले गोविंद राधे |
सदा सदा को आनन्द दिला दे ||

भावार्थ- एक बार भगवान् के दिव्य दर्शन प्राप्त होने पर तो जीव सदा के लिये आनन्दमय हो जाता है |

हरि दर्शन ते ही गोविंद राधे |
उर माया ग्रन्थि जाती है बता दे ||

भावार्थ- भगवान् के दिव्य दर्शन प्राप्त होने पर ही जीव के हृदय से माया की ग्रन्थि समाप्त होती है |

..................राधा गोविंद गीत ( जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ).................