Thursday, April 25, 2013

हम भगवान् के आगे , उनको सामने खड़ा करके , रोकर उनका दर्शन , उनका प्रेम माँगे। रोकर माँगे ,अकड़ कर नहीं, जैसे कोई पानी में डूबने लगता है तो वो कितनी विहलता , व्याकुलता में हाथ- पैर ऊपर करता है, तैरना नहीं जानता है। जैसे मछली को बाहर दाल दो , कैसे तड़पती है, पानी के लिये। ऐसे ही श्यामसुन्दर के मिलन के लिये हमको तड़पना होगा।
बिनु रोये किन पाइयां प्रेम पियरो मीत।
******जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु******
हम भगवान् के आगे , उनको सामने खड़ा करके , रोकर उनका दर्शन , उनका प्रेम माँगे। रोकर माँगे ,अकड़ कर नहीं, जैसे कोई पानी में डूबने लगता है तो वो कितनी विहलता , व्याकुलता में हाथ- पैर ऊपर करता है, तैरना नहीं जानता है। जैसे मछली को बाहर दाल दो , कैसे तड़पती है, पानी के लिये। ऐसे ही श्यामसुन्दर के मिलन के लिये हमको तड़पना होगा।
बिनु रोये किन पाइयां प्रेम पियरो मीत।
******जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु******