Friday, April 12, 2013

मन का भगवान के पास जाना ही उपासना है। भगवान केवल भाव नोट करते हैं, क्रिया नहीं। जो कर्म भगवान में प्रेम उत्पन्न नहीं करता, वह अधर्म ही है। जिस किसी प्रकार से भी मन भगवान में आसक्त हो वही साधना है।

- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज.
मन का भगवान के पास जाना ही उपासना है। भगवान केवल भाव नोट करते हैं, क्रिया नहीं। जो कर्म भगवान में प्रेम उत्पन्न नहीं करता, वह अधर्म ही है। जिस किसी प्रकार से भी मन भगवान में आसक्त हो वही साधना है। 

- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज