Monday, April 8, 2013

कृष्ण मुस्कुराये कहा गोविंद राधे |
मैंने जानि जानि के ना पोता बता दे ||

भावार्थ- श्रीकृष्ण ने स्मित हास्य के साथ कहा स्वामी मैंने जानबूझकर ऐसा किया है |
 
निज धाम जाने के गोविंद राधे |
पूर्व व्याध मारेगा बाण बता दे ||

भावार्थ- यदि मैं दोनों चरणों के तलवों में खीर पोत लेता तो आपके आशीर्वाद से मुझे शरीर के किसी स्थान पर कोई अस्त्र असर ही न करता | अब अपने धाम जाने के पूर्व एक व्याध द्वारा मारा गया बाण इस कार्य का निमित बनेगा |

श्री गुरु चरणों में गोविंद राधे |
शरणागति हो तो हरि ते मिला दे ||

भावार्थ- यदि जीव की गुरु चरणों में शरणागति हो जाय तो उसे निशित रूप से हरि दर्शन प्राप्त हो जायेगा |

..................राधा गोविंद गीत ( जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ).
कृष्ण मुस्कुराये कहा गोविंद राधे |
मैंने जानि जानि के ना पोता बता दे ||

भावार्थ- श्रीकृष्ण ने स्मित हास्य के साथ कहा स्वामी मैंने जानबूझकर ऐसा किया है |

निज धाम जाने के गोविंद राधे |
पूर्व व्याध मारेगा बाण बता दे ||

भावार्थ- यदि मैं दोनों चरणों के तलवों में खीर पोत लेता तो आपके आशीर्वाद से मुझे शरीर के किसी स्थान पर कोई अस्त्र असर ही न करता | अब अपने धाम जाने के पूर्व एक व्याध द्वारा मारा गया बाण इस कार्य का निमित बनेगा |

श्री गुरु चरणों में गोविंद राधे |
शरणागति हो तो हरि ते मिला दे ||

भावार्थ- यदि जीव की गुरु चरणों में शरणागति हो जाय तो उसे निशित रूप से हरि दर्शन प्राप्त हो जायेगा |

..................राधा गोविंद गीत ( जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ).................