Friday, March 11, 2016

हे जगद्गुरुत्तम कृपालु महाप्रभु!
आपने अपने अथक प्रयासों से अध्यात्म जगत में व्याप्त मत-मतान्तरों का सुन्दर समन्वय कर समस्त विरोधाभासों को दूर किया है। सिद्धांत पक्ष को इतना सरल, सारगर्भित एवं सर्वसुगम बना दिया है कि आपको सुनने के बाद कोई भी व्यक्ति अपने आप को वेद-निष्णात से कम नहीं समझता। फिर उस व्यक्ति के लिए उलझन नाम की कोई चीज़ ही नहीं रह जाती है।
आप न केवल सैद्धांतिक पक्ष को जनमानस में पक्का करते है अपितु स्वयं अपने निर्देशन में व्यावहारिक साधना भी कराते है।आप जीव मात्र के कल्याण हेतु निशि-दिन प्रयत्नरत है।
आप भक्तियोगरसावतार है अतः हम सबके लिए साधन एवं साध्य भी आप ही है।
आपने इस धराधाम पर अवतार लेकर अपना नाम, रूप, गुण, लीला, धाम, जन आदि देकर हम अधमों पर 'गुरु' कृपा की है जिसका अवलंब लेकर हम अपने परम चरम लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है। सम्पूर्ण विश्व आपकी कृपाओं का सदैव ऋणी रहेगा।

बोलिये "अलबेली सरकार की जय।"
जय श्री राधे।