Wednesday, May 15, 2013

दीनता भीतर रहे , और बहार से एक्टिंग में क्रोध का व्यवहार भी करना होगा ! संसार में हर तरह का व्यवहार करना होगा लेकिन भीतर गड़बड़ न हो ! भीतर दीनता , सहनशीलता , नम्रता यही गुण रहें और बाहर से जैसा व्यवहार बाहर वाला करे उसी का जवाब देना चाहिए ! अब एक बदमाश घर में घुसे और उससे तुम कह दो कि आप कैसे पधारे ? नहीं , उसकी चप्पल से पिटाई करो , लेकिन भीतर से गड़बड़ न करो ! ये मतलब है ! दीनता , नम्रता और सरे गुण अंतःकरण में रहने चाहिये और संसार के व्यवहार में सब तरह का व्यवहार करना चाहिए ! जैसा पात्र हो वैसा व्यवहार करो ! बच्चे का सुधार करना है , उसको डाँटना है , गुस्से की एक्टिंग करो , गुस्सा न करो ! भीतर गड़बड़ न करो , बाहर से गड़बड़ की एक्टिंग करो ! इतने मर्डर किये अर्जुन ने , हनुमान ने , प्रह्लाद वगैरह ने , भीतर गड़बड़ नहीं हुआ बाहर से सब एक्टिंग हो रही है ! पिक्चर में जैसे प्यार की एक्टिंग करते हैं , दुश्मनी की एक्टिंग करते हैं , मारधाड़ करते हैं , वैसे ही मुँह बनाते हैं ! लेकिन भीतर नहीं ! वो तो पैसा कमाने को एक्टिंग कर रहे हैं ऐसे ही हमको बाहर से व्यवहार करना है अनेक प्रकार का लेकिन भीतर नार्मल रहें !
**********जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज**********
दीनता भीतर  रहे , और बहार से एक्टिंग में क्रोध का व्यवहार भी करना होगा ! संसार में हर तरह का व्यवहार करना होगा लेकिन भीतर गड़बड़ न हो ! भीतर दीनता , सहनशीलता , नम्रता यही गुण रहें और बाहर से जैसा व्यवहार बाहर वाला करे उसी का जवाब देना चाहिए ! अब एक बदमाश घर में घुसे और उससे तुम कह दो कि आप कैसे पधारे ? नहीं , उसकी चप्पल से पिटाई करो , लेकिन भीतर से गड़बड़ न करो ! ये मतलब है ! दीनता , नम्रता और सरे गुण अंतःकरण में रहने चाहिये और संसार के व्यवहार में सब तरह का व्यवहार करना चाहिए ! जैसा  पात्र हो वैसा व्यवहार करो ! बच्चे का सुधार करना है , उसको  डाँटना है , गुस्से की एक्टिंग करो , गुस्सा न करो ! भीतर गड़बड़ न करो , बाहर से गड़बड़ की एक्टिंग करो ! इतने मर्डर किये अर्जुन ने , हनुमान ने , प्रह्लाद वगैरह ने , भीतर गड़बड़ नहीं हुआ बाहर से सब एक्टिंग हो रही है ! पिक्चर में जैसे प्यार की एक्टिंग करते हैं , दुश्मनी की एक्टिंग करते हैं , मारधाड़ करते हैं , वैसे ही मुँह बनाते हैं ! लेकिन भीतर नहीं ! वो तो पैसा कमाने को एक्टिंग कर रहे हैं ऐसे ही हमको बाहर से व्यवहार करना है अनेक प्रकार का लेकिन भीतर नार्मल रहें ! 
**********जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज**********