Sunday, June 14, 2015

श्री महाराज जी अपने सम्पूर्ण साहित्य एवं प्रवचन द्वारा पुनः - पुनः यही सिद्धान्त जीवों के मस्तिष्क में भर रहें हैं। उनके मतानुसार ब्रह्म जीव माया तीन तत्व सनातन हैं , किन्तु जीव एवं माया दोनों ही ब्रह्म की शक्ति हैं। ब्रह्म श्री राधाकृष्ण का दिव्य प्रेम प्राप्त करना साध्य एवं उनकी ही निष्काम भक्ति करना ही साधना है।