Friday, January 6, 2012

हरि हरिजन के कार्य को,कारण कछु न लखाय।
पर उपकार स्वभाव वश,करत कार्य जग आय।।

भगवान एवं महापुरुषों के किसी भी कार्य का एक ही कारण है। वह यह कि उनका स्वभाव ही केवल परोपकार का होता है।

--------जगद्गुरू श्री कृपालुजी महाराज।