Sunday, April 6, 2014

कोशिश करने पर अवश्य ही दोष कम होते हैं। लेकिन जब कोशिश ही कम होती है तब दोष भी कम ठीक होते हैं। गलती तो सभी से होती है , लेकिन बार - बार कहने पर भी गलती हो , यह सबसे बड़ी मिस्टेक है।
लोगों को दूसरों की तो बड़ी भारी फिक्र है लेकिन हमारा क्या होगा , इसकी फिक्र क्यों नहीं करते हो।

………जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।