Sunday, August 11, 2013

तेरे हाथ सब है मना… हरी गुरु गहू शरणा।।।
योवन तन और धना... चांदनी है चार दिना।।।
जोड़ी जोड़ी धरे क्यों धना... तन भी न साथी अपना।।।
सुर मांगे मनुज तना... बार बार नही मिलना।।।
तन तो है माट्टी का बना… माट्टी में ही मिलेगा मना।।।
सुमिरन कर ले मना… छिन-छिन राधारमना।।

**********जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज*************