Wednesday, February 6, 2013

‎84 लाख शरीरों में मानव देह ही ऐसा है जिसमें साधना द्वारा मानव , महामानव बन सकता है ! किन्तु साथ ही यह मानव देह क्षणभंगुर है ! अतएव तन,मन,धन,का उपयोग भगवद्विषय में तुरन्त करना चाहिए ! उतिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत ( वेद )
, उठो , जागो , महापुरुष की शरण में जाओ एवं अपना लक्ष्य प्राप्त करो !

***********जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज*************